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काशी में महालक्ष्मी की आराधना के लिए सोरहिया मेला रविवार से

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–लक्ष्मीकुंड स्थित महालक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालु महिलाएं लगाएंगी हाजिरी

–दिन भर चलती रही पूजा की तैयारी, इस बार मेला 16 दिन के बजाय 15 दिन का

वाराणसी, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में महालक्ष्मी को समर्पित 16 दिवसीय सोरहिया मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। भाद्रपद शुक्ल, अष्टमी तिथि रविवार (31 अगस्त) से लक्ष्मीकुंड पर शुरू हो रहे मेले में श्रद्धालु महालक्ष्मी मंदिर में हाजिरी लगाने के साथ 16 दिवसीय व्रत का भी संकल्प लेंगे। घरों में भी सनातनी पूरे 16 दिन महालक्ष्मी की आराधना करते हैं। इसके लिए उन्होंने लक्ष्मी की प्रतिमा व उनका वस्त्र और अन्य पूजन सामग्री भी खरीदी। महालक्ष्मी मंदिर और घरों में भी श्रीसूक्त का पाठ होगा।

महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी गणेश उपाध्याय ने बताया कि मेले की पूरी तैयारी हो चुकी है। भोर में माता रानी के विग्रह का श्रृंगार भोग आरती के बाद मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा। पुजारी ने बताया कि सोरहिया मेला 16 दिन का होता है। लेकिन इस बार 15 दिन का ही होगा। 15 सितम्बर को माता रानी का भव्य श्रृंगार के साथ विशाल भंडारा भी चलेगा। पुजारी ने बताया कि सोरहिया मेले में माता लक्ष्मी का पूजन करने से घर में सुख, शांति, आरोग्य, ऐश्वर्य एवं स्थिर लक्ष्मी का वास होता है। 16 दिनों तक कमल के फूल से माता रानी की पूजा अर्चना होती है। आश्विन कृष्ण, अष्टमी पर्यन्त पूजा के बाद जीवित्पुत्रिका के पूजन के साथ इसका समापन होगा।

खास बात यह है कि इस व्रत में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। 16 बार 16 अंजलि जल से मुख एवं हाथ धोकर 16 दिवसीय व्रत का संकल्प करना चाहिए। कथा श्रवण के बाद महालक्ष्मी के विग्रह की 16 परिक्रमा कर उन्हें 16 गांठ का धागा, 16 दूर्वा एवं 16 अक्षत अर्पित करना चाहिए। फिर मूर्ति के सामने आटे से बने 16 दीपक जलाना चाहिए।

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(Udaipur Kiran) / श्रीधर त्रिपाठी

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